राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत के हालिया बयान ने देशभर में सामाजिक समरसता और समानता को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। Sangh Chief Mohan Bhagwat ने साफ कहा कि संघ प्रमुख किसी भी जाति का हो सकता है और संगठन में नेतृत्व जाति के आधार पर नहीं, बल्कि योग्यता और सेवा भावना से तय होता है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में जातिगत राजनीति और प्रतिनिधित्व को लेकर बहस तेज है।
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संघ की सोच और नेतृत्व का सिद्धांत
अपने संबोधन में Sangh Chief Mohan Bhagwat ने कहा कि RSS की स्थापना से ही उसका उद्देश्य समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलना रहा है। संघ में किसी भी पद पर पहुंचने के लिए व्यक्ति की निष्ठा, अनुशासन और संगठन के प्रति समर्पण को प्राथमिकता दी जाती है, न कि उसकी जाति या सामाजिक पृष्ठभूमि को।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संघ के स्वयंसेवक देश के हर कोने और हर समाज से आते हैं। इसी विविधता के कारण संघ एक मजबूत सामाजिक संगठन के रूप में खड़ा है। Sangh Chief Mohan Bhagwat का यह बयान उन धारणाओं को तोड़ने वाला माना जा रहा है, जिनमें संघ को किसी विशेष वर्ग से जोड़कर देखा जाता है।
सामाजिक समरसता पर जोर
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने अपने वक्तव्य में सामाजिक समरसता को राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बताया। उनका कहना था कि समाज तब ही आगे बढ़ सकता है जब सभी वर्गों को समान अवसर और सम्मान मिले। जातिगत भेदभाव समाज को बांटता है और विकास की गति को धीमा करता है।
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राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं
मोहन भागवत के इस बयान पर राजनीतिक और सामाजिक जगत से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कई सामाजिक संगठनों और बुद्धिजीवियों ने इसे सकारात्मक और समावेशी सोच का परिचायक बताया है। वहीं कुछ आलोचकों ने इस बयान को प्रतीकात्मक करार दिया।
इसके बावजूद, Sangh Chief Mohan Bhagwat का यह वक्तव्य युवाओं के बीच खासा चर्चा का विषय बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयान जाति से ऊपर उठकर सोचने और राष्ट्र सेवा की भावना को मजबूत करते हैं।
युवाओं के लिए संदेश
अपने संबोधन के दौरान Sangh Chief Mohan Bhagwat ने युवाओं से आह्वान किया कि वे जाति, वर्ग और संकीर्ण सोच से ऊपर उठकर समाज और देश के लिए काम करें। उन्होंने कहा कि नेतृत्व वही कर सकता है जो समाज को जोड़ने का काम करे।
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निष्कर्ष
कुल मिलाकर, मोहन भागवत का यह बयान संघ की समावेशी और समानतावादी सोच को मजबूती से सामने लाता है। Sangh Chief Mohan Bhagwat ने यह स्पष्ट कर दिया है कि संघ में नेतृत्व का रास्ता सभी के लिए खुला है, चाहे वह किसी भी जाति से क्यों न हो। यह संदेश न केवल RSS के लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए एक सकारात्मक और प्रेरणादायक संकेत है।